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क्या डेट फंड्स रिस्क फ्री होते हैं?

क्या डेट फंड्स रिस्क फ्री होते हैं?
Risk Free Return: जून तिमाही की बात करें तो कुल इनफ्लो का 70 फीसदी तो सिर्फ लिक्विड फंड से आया है.

फिक्स्ड डिपॉजिट क्या बेहतर है?

एक समय था जब बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट्स (एफडी) रूढ़िवादी(Conservative) निवेशकों के लिए बहुत लंबे समय के लिए पसंदीदा निवेश एवेन्यू था। यह पूंजी संरक्षण सुनिश्चित करते हुए ब्याज कमाने का सबसे अच्छा विकल्प था। पिछले कुछ वर्षों में, हुए बदलाओ में लोग म्युचुअल फंड कोर में आए हैं। नतीजतन, एफडी को अब सबसे लोकप्रिय दीर्घकालिक निवेश सम्पत्ति नहीं माना जाता है।

2016 की नोटबॅंधी के दौरान, म्यूचुअल फंड कम जमा रिटर्न दरों के अवसर को भुनाने में सक्षम थे। इसके अलावा, कर बचत म्यूचुअल फंड की उपलब्धता के कारण, म्यूचुअल फंड कि प्रमुखता बढ़ी।

डेट म्यूचुअल फंड में निवेश क्यों?

डेट फंड और एफडी में बड़ा अंतर यह है कि डेट फंड फ्लेक्सबिल्टी के साथ बहुत अधिक विकल्प प्रदान करते हैं। अक्टूबर 2019 के अनुसार बैंक अपनी एफडी पर केवल 5% से 8 % तक ब्याज देते हैं।दूसरी ओर डेट फंड ब्याज दरों की गिरावट से लाभान्वित होंते हैं, क्योंकि डेट फंड्स एनएवी की सराहना करते हैं जब दरें गिरती हैं।

उच्च तरलता: डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं को अक्सर फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए वैकल्पिक निवेश के रूप में देखा जाता है - क्योंकि वे समय के साथ आय प्रदान करते हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट में आमतौर पर अनिवार्य लॉक-इन अवधि होती है जब्कि म्यूचुअल फंड से आप कभी भी निकास कर सकते हैं |

कर दक्षता- हालांकि यह सच है कि डेट म्यूचुअल फंड स्कीमों पर लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है, यह ध्यान रखना चाहिए कि तीन साल के होल्डिंग के बाद इंडेक्सेशन का फायदा बढ़ता है और हर बीतते साल के साथ भी ।

लचीलापन- डेट फंड स्कीम में निवेश किया गया पैसा अक्सर इक्विटी स्कीम या निवेशक के चयन की किसी अन्य स्कीम में आसानी से ट्रांसफर किया जा सकता है।

अधिक रिटर्न- बचत बैंक खातों या एफडी जैसे;- पारंपरिक विकल्पों की तुलना में, डेट म्यूचुअल फंड कहीं अधिक रिटर्न की संभावना प्रदान करते हैं।

फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश क्यों?

बैंक चुने गए कार्यकाल के आधार पर एफडी में पूर्व-निर्धारित ब्याज दर प्रदान करते हैं।

फिक्स्ड डिपॉजिट के बारे में एक अच्छी बात यह है, कि बाजार के उतार- चढ़ाव आपके कमाए गए रिटर्न को प्रभावित नहीं करते। इसलिए आम तौर पर, अर्थव्यवस्था में कम ब्याज दरों के दौरान भी एक बड़ी मार्जिन से फिक्स्ड डिपॉजिटआगे निकल जाती है।

गारंटीड रिटर्न निवेश पर रिटर्न की गारंटी है। एफडी में आपके द्वारा जमा की गई राशि के जमा के समय से ही ब्याज दर पर ब्याज अर्जित करता हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव आपके निवेश पर रिटर्न को प्रभावित नहीं करता है। शायद यही कारण है कि अधिकांश अनुभवी निवेशक अभी भी अपने निवेश का एक हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट में रखना पसंद करते हैं|

कार्यकाल फिक्स्ड डिपॉजिट कार्यकाल बहुत लचीला नहीं होता है, लेकिन उसमें कई विकल्प उपलब्ध होते हैं| यह ग्राहकों की आवश्यकताओं के आधार पर 7 दिनों से लेकर 10 वर्ष तक होता है। आप एक ही बैंक में एक या अलग-अलग कार्यकाल के लिए एक ही समय में कई फिक्स्ड डिपॉजिट खोल सकते हैं।बचत खाते की तुलना में फिक्स्ड डिपॉजिट पर रिटर्न की दर अधिक होती है। फिक्स्ड डिपॉजिट के कार्यकाल के आधार पर ब्याज दरों में बदलाव होता है।

ब्याज भुगतान का तरीका ग्राहक ब्याज की आवृत्ति चुन सकता है, यह मासिक, त्रैमासिक या वार्षिक आधार पर होती हैं, और अन्य ग्राहकों की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज की दर अधिक है।

फिक्स्ड डिपॉजिट के विरुद्ध ऋण लेना आसान यदि आपको तत्काल धन की आवश्यकता है, तो आपके फिक्स्ड डिपॉजिट के खिलाफ ऋण लेना आसान है। ग्राहक सावधि जमा की मूल राशि का 90% तक उधार ले सकता है। ग्राहक एफडी के खिलाफ ऋण लेने पर भी ब्याज अर्जित करता रहता है। यह ब्याज आपके ऋण को अधिक आसानी से चुकाने में आपकी सहायता करता है।

संयुक्त फिक्स्ड डिपॉजिट खोलने के लिए विकल्प: बहुत से लोग नहीं जानते हैं कि उनके पास अपने पति या पत्नी, बच्चों या माता-पिता के साथ फिक्स्ड डिपॉजिट हो सकता है। हालांकि, यह याद रखना चाहिए कि समय से पहले निकासी या फिक्स्ड डिपॉजिट के खिलाफ ऋण के लिए आवेदन करने के मामले में, सभी एफडी धारकों को आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता है।

म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट कैसे करे – आसान हिन्दी में बेहतरीन आर्टिकल्स की एक शुरुआती गाइड

म्युचुअल फंड इन्वेस्टमेंट हर एक इन्वेस्टर के बीच काफ़ी लोकप्रिय हैं । जिसका कारण है इससे मिलने वाले फायदे। इसके कईं फायदों में से कुछ सबसे महत्वपूर्ण फ़ायदे नीचे दिए हैं, जो इन्वेस्टर्स को अपनी ओर खींचते है और जिसकी वजह से –

  • इन्वेस्टर्स कितनी भी राशि के साथ शुरुआत कर सकते हैं ( 500 जितना कम भी )
  • इन्वेस्टर्स, अलग-अलग स्टॉक्स और डेट,गोल्ड जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में इन्वेस्ट कर सकते हैं
  • हर महीने ऑटोमेटेड इन्वेस्मेंट्स शुरू कर सकते हैं (SIP)
  • डीमैट अकाउंट खोले बिना भी इन्वेस्ट कर सकते हैं

शुरुआती इन्वेस्टर्स के लिए इस म्युचुअल फंड इन्वेस्टमेंट गाइड में हमने कुछ आर्टिकल्स को आपके लिए चुना है। जो म्युचुअल फंड को समझने में और कैसे इन्वेस्ट करना शुरू करें, इसमें आपकी मदद करेंगे। हम सुझाव देंगे कि आप इस पेज को बुकमार्क कर लें ताकि आप इन आर्टिकल्स को अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी पढ़ सकें।

1.म्युचुअल फंड्स की जानकारी

अगर आप म्युचुअल फंड्स और उसके प्रकारों के बारे में पहले से जानते हैं, तो आप सीधे अगले सेक्शन पर जा सकते है । ये 5 आर्टिकल्स, म्युचुअल फंड्स और उसके प्रकारों के बारे में सारी ज़रूरी जानकारी देंगे । हम टैक्स सेविंग फंड्स पर भी एक विशेष आर्टिकल दे रहे हैं।

    और ये कैसे काम करते हैं?
  • म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करना बनाम डायरेक्ट इक्विटी
  • . म्युचुअल फंड्स के फायदे और नुकसान
  • टैक्स सेविंग(ईएलएसएस) फंड्स

2.म्युचुअल फंड्स का एक पोर्टफ़ोलियो बनाना

म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करने का सही तरीका है – सबसे पहले इसका पोर्टफोलियो बनाना । एक पोर्टफोलियो, म्युचुअल फंड का एक समूह होता है। यह आपको अपने इन्वेस्टमेंट के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा। आपका सारा रिटर्न् आपके पूरे पोर्टफोलियो पर टिका होता है, ना कि किसी एक विशेष फंड पर। इस सेक्शन में, हम यह सीखेंगे कि म्युचुअल फंड पोर्टफोलियो कैसे तैयार किया जाता है।

  • पोर्टफोलियो इन्वेस्टिंग क्या है कैसे तैयार किया जाए
  • अपने पोर्टफोलियो के लिए सही म्युचुअल फंड चुनना
  • म्युचुअल फंड को कब बेचें

3.म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करना

कईं शुरुआती इन्वेस्टर्स म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करने की प्रक्रिया को मुश्किल मानकर उसमें इन्वेस्ट करने से कतराते हैं। ये आर्टिकल्स ऐसे ही शुरुआती इन्वेस्टर्स को म्युचुअल फंड को समझने में और इन्वेस्टमेंट शुरू करने में मदद करेंगे।

    और ये म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करने के लिए ज़रूरी क्यों है (SIP) के द्वारा इन्वेस्ट करना

4.कुछ और महत्वपूर्ण जानकारियाँ

म्युचुअल फंड्स में इन्वेस्ट करते समय कुछ ज़रूरी बातें है, जिनकी जानकारी हर शुरुआती इन्वेस्टर को होनी चाहिए । इन बातों को समझे बिना इन्वेस्ट करने से, रिटर्न्स पर काफ़ी बुरा असर पड़ सकता है।

  • म्युचुअल फंड्स पर टैक्स
  • म्युचुअल फंड्स से पैसे निकालने पर एग्ज़िट लोड
  • म्युचुअल फंड्स का एक्सपेंस रेशो
  • इन्वेस्टमेंट से जुड़ी भाषा की जानकारी

जहाँ म्युचुअल फंड्स की बात आती है वहाँ आमतौर पर लिस्ट में दिए गए इन शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है । हालाँकि शुरुआती इन्वेस्टर्स को इन सभी शब्दों को याद रखने की ज़रूरत नहीं है, आप किसी भी शब्द को सीखने के लिए, ग्लोसरी (डिक्शनरी) के तौर पर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

निवेशकों के लिए कमाई के दो मौके, लॉन्च हुए दो नए टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड

दोनों नए फंड ऑफर यानि एनएफओ 10 अक्टूबर से खुल गए हैं और 18 अक्टूबर 2022 को बंद हो जाएंगे, फंड्स में कम से कम 5000 रुपये का निवेश किया जा सकता है.

निवेशकों के लिए कमाई के दो मौके, लॉन्च हुए दो नए टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड

TV9 Bharatvarsh | Edited By: सौरभ शर्मा

Updated on: Oct 12, 2022 | 7:52 AM

कम जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न की उम्मीद रखने वाले लोगों के लिए निवेश के दो मौके मिल रहे हैं. दरअसल मिरे एसेट म्यूचुअल फंड ने अपने दो नए फंड लॉन्च किए हैं जो कि टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड हैं. ये हैं मिरे एसेट निफ्टी एएए पीएसयू बॉन्ड प्लस एसडीएल अप्रैल 2026 50:50 इंडेक्स फंड और मिरे एसेट क्रिसिल आईबीएक्स गिल्ट इंडेक्स – अप्रैल 2033 इंडेक्स फंड. टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड्स एक डेट फंड होते हैं. इनकी एक खास मैच्योरिटी डेट दी जाती है जो कि उनके पोर्टफोलियो में मौजूद बॉन्ड की एक्सपायरी डेट के मुताबिक होती है. हाल के दिनों में टारगेट मैच्योरिटी फंड्स पर निवेशकों को भरोसा बढ़ा है. फंड तुलनात्मक रूप से लोअर इंटरेस्ट रेट रिस्क और अधिक प्रिडिक्टिव और स्टेबल रिटर्न प्रदान करते हैं,

क्या है ये स्कीम

मिरे एसेट निफ्टी एएए पीएसयू बॉन्ड प्लस एसडीएल अप्रैल 2026 50:50 इंडेक्स फंड 30 अप्रैल 2026 या उससे पहले परिपक़्व हो रहे एएए रेटेड पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) बॉन्ड और स्टेट डेवलपमेंट लोन (एसडीएल) में निवेश करके, निफ्टी एएए पीएसयू बॉन्ड प्लस एसडीएल अप्रैल 2026 50:50 इंडेक्स को ट्रैक करता है। ये एक फिक्स्ड मैच्योरिटी इंडेक्स फंड है जिसमें अपेक्षाकृत कम क्रेडिट रिस्क और कोई लॉक इन नहीं है. यानि निवेशक जब चाहे इसमे सब्सक्राइब कर सकता है या रिडीम कर सकता है. वहीं मिरे एसेट क्रिसिल आईबीएक्स गिल्ट इंडेक्स- अप्रैल 2033 इंडेक्स फंड क्रिसिल आईबीएक्स गिल्ट इंडेक्स अप्रैल 2033 का ट्रैक करता है. यह 29 अप्रैल 2033 या उससे पहले मैच्योर हो रही गवर्नमेंट सिक्योरिटी में निवेश करता है.

कब कर सकते हैं निवेश

दोनों नए फंड ऑफर यानि एनएफओ 10 अक्टूबर से खुल गए हैं और 18 अक्टूबर 2022 को बंद हो जाएंगे. दोनों फंड्स का प्रबंधन महेंद्र जाजू, सीआईओ-फिक्स्ड इनकम, मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट द्वारा किया जाएगा. फंड्स में कम से कम 5000 रुपये का निवेश किया जा सकता है उसके बाद निवेश 1 रुपये के मल्टीपल में हो सकता है. महेंद्र जाजू के मुताबिक मौजूदा अनिश्चित और अस्थिर बाजार के माहौल में, जहां कई केंद्रीय बैंक दरों में प्रमुख नीतिगत दरें बढ़ाना जारी रखते हैं, टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड को लेकर लोगों का रुझान बढ़ा है.

क्या है खासियतें:

एसडीएल और एएए रेटेड पीएसयू सिक्योरिटी पर आमतौर पर कॉरपोरेट बॉन्ड की तुलना में अपेक्षाकृत कम क्रेडिट रिस्क होता है।

आगे चलकर अगर महंगाई दर रिजर्व बैंक की तय सीमा के अंदर रहता है और आर्थिक ग्रोथ को आउटलुक पर कोई असर नहीं पड़ता है तो 10 ईयर जी-सेक के दायरे में रहते हुए आगे बढ़ने की उम्मीद है।

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अधिक मैच्योरिटी पीरियड में जी-सेक एसडीएल और एएए पीएसयू कॉरपोरेट बॉन्ड जैसे अन्य उपलब्ध विकल्पों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर है।

निवेशकों के लिए कमाई के दो मौके, लॉन्च हुए दो नए टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड

दोनों नए फंड ऑफर यानि एनएफओ 10 अक्टूबर से खुल गए हैं और 18 अक्टूबर 2022 को बंद हो जाएंगे, फंड्स में कम से कम 5000 रुपये का निवेश किया जा सकता है.

निवेशकों के लिए कमाई के दो मौके, लॉन्च हुए दो नए टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड

TV9 Bharatvarsh | Edited By: सौरभ शर्मा

Updated on: Oct 12, 2022 | 7:52 AM

कम जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न की उम्मीद रखने वाले लोगों के लिए निवेश के दो मौके मिल रहे हैं. दरअसल मिरे एसेट म्यूचुअल फंड ने अपने दो नए फंड लॉन्च किए हैं जो कि टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड हैं. ये हैं मिरे एसेट निफ्टी एएए पीएसयू बॉन्ड प्लस एसडीएल अप्रैल 2026 50:50 इंडेक्स फंड और मिरे एसेट क्रिसिल आईबीएक्स गिल्ट इंडेक्स – अप्रैल 2033 इंडेक्स फंड. टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड्स एक डेट फंड होते हैं. इनकी एक खास मैच्योरिटी डेट दी जाती है जो कि उनके पोर्टफोलियो में मौजूद बॉन्ड की एक्सपायरी डेट के मुताबिक होती है. हाल के दिनों में टारगेट मैच्योरिटी फंड्स पर निवेशकों को भरोसा बढ़ा है. फंड तुलनात्मक रूप से लोअर इंटरेस्ट रेट रिस्क और अधिक प्रिडिक्टिव और स्टेबल रिटर्न प्रदान करते हैं,

क्या है ये स्कीम

मिरे एसेट निफ्टी एएए पीएसयू बॉन्ड प्लस एसडीएल अप्रैल 2026 50:50 इंडेक्स फंड 30 अप्रैल 2026 या उससे पहले परिपक़्व हो रहे एएए रेटेड पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) बॉन्ड और स्टेट डेवलपमेंट लोन (एसडीएल) में निवेश करके, निफ्टी एएए पीएसयू बॉन्ड प्लस एसडीएल अप्रैल 2026 50:50 इंडेक्स को ट्रैक करता है। ये एक फिक्स्ड मैच्योरिटी इंडेक्स फंड है जिसमें अपेक्षाकृत कम क्रेडिट रिस्क और कोई लॉक इन नहीं है. यानि निवेशक जब चाहे इसमे सब्सक्राइब कर सकता है या रिडीम कर सकता है. वहीं मिरे एसेट क्रिसिल आईबीएक्स गिल्ट इंडेक्स- अप्रैल 2033 इंडेक्स फंड क्रिसिल आईबीएक्स गिल्ट इंडेक्स अप्रैल 2033 का ट्रैक करता है. यह 29 अप्रैल 2033 या उससे पहले मैच्योर हो रही गवर्नमेंट सिक्योरिटी में निवेश करता है.

कब कर सकते हैं निवेश

दोनों नए फंड ऑफर यानि एनएफओ 10 अक्टूबर से खुल गए हैं और 18 अक्टूबर 2022 को बंद हो जाएंगे. दोनों फंड्स का प्रबंधन महेंद्र जाजू, सीआईओ-फिक्स्ड इनकम, मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट द्वारा किया जाएगा. फंड्स में कम से कम 5000 रुपये का निवेश किया जा सकता है उसके बाद निवेश 1 रुपये के मल्टीपल में हो सकता है. महेंद्र जाजू के मुताबिक मौजूदा अनिश्चित और अस्थिर बाजार के माहौल में, जहां कई केंद्रीय बैंक दरों में प्रमुख नीतिगत दरें बढ़ाना जारी रखते हैं, टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड को लेकर लोगों का रुझान बढ़ा है.

क्या है खासियतें:

एसडीएल और एएए रेटेड पीएसयू सिक्योरिटी पर आमतौर पर कॉरपोरेट बॉन्ड की तुलना में अपेक्षाकृत कम क्रेडिट रिस्क होता है।

आगे चलकर अगर महंगाई दर रिजर्व बैंक की तय सीमा के अंदर रहता है और आर्थिक ग्रोथ को आउटलुक पर कोई असर नहीं पड़ता है तो 10 ईयर जी-सेक के दायरे में रहते हुए आगे बढ़ने की उम्मीद है।

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रिस्क फ्री रिटर्न का ठिकाना बना लिक्विड फंड; फायदे, रिटर्न, ​जोखिम से टैक्स तक, जानें सब कुछ

Risk Free Return: जून तिमाही की बात करें तो कुल इनफ्लो का 70 फीसदी तो सिर्फ लिक्विड फंड से आया है.

रिस्क फ्री रिटर्न का ठिकाना बना लिक्विड फंड; फायदे, रिटर्न, ​जोखिम से टैक्स तक, जानें सब कुछ

Risk Free Return: जून तिमाही की बात करें तो कुल इनफ्लो का 70 फीसदी तो सिर्फ लिक्विड फंड से आया है.

कोरोना वायरस महामारी के दौर में म्यूचुअल फंड निवेशकों का रिटर्न भी बिगड़ा है. इक्विटी सेग्मेंट की ज्यादातर कटेगिरी में 1 से 3 साल के रिटर्न पर असर पड़ा है. कहां रिटर्न घट गया तो कहीं निगेटिव में चला गया. ऐसे में इस दौर में निवेशकों ने ज्यादा रिटर्न की लालच करने की बजाए सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया है. उनका ज्यादातर निवेश अब फिक्स्ड इनकम सिक्युरिटीज में पैसा लगाने वाले डेट फंड में लग रहा है. इनमें भी निवेशकों की पहली पसंद लिक्विड फंड रहा है. जून तिमाही की बात करें तो कुल इनफ्लो का 70 फीसदी तो सिर्फ लिक्विड फंड से आया है.

लिक्विड फंड में 86,493 करोड़ रुपये का निवेश

जून तिमाही की बात करें तो डेट फंड के हर सेग्मेंट में निवेश देखने को मिला है. म्‍यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, डेट म्यूचुअल फंडों का एसेट्स बेस जून अंत 11.63 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो मार्च तिमाही में 11.5 लाख करोड़ रुपये था. जून को खत्म तिमाही के दौरान डेट म्यूचुअल फंडों में 1.1 लाख करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला. इस दौरान नियमित आय वाले कुल निवेश का 80 फीसदी निवेश लिक्विड फंडों में किया गया. जून तिमाही में लिक्विड फंडों में कुल 86,493 करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला, जबकि मार्च तिमाही में इने 94,180 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी.

लिक्विड फंड्स क्या हैं?

लिक्विड फंड, डेट फंड का ही सबसेट है. लिक्विड फंड फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं, जिसकी मेच्योरिटी अवधि बहुत कम होती है. इन सिक्योरिटीज की मेच्योरिटी 91 दिनों से कम या उसके बराबर होती है. ये गवर्नमेंट सिक्युरिटीज, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट, ट्रेजरी बिल्स, कमर्शियल पेपर्स और दूसरे डेट इंस्टू्मेंट्स में निवेश करते हैं. इनमें डेट फंड की दूसरी कटेगिरी की तुलना में जोखिम कम होता है, वहीं लिक्विडिटी अधिक. लिक्विड फंड का दूसरा नाम है कैश फंड और इसका मकसद ज्यादा लिक्विडिटी, कम जोखिम और स्थिर रिटर्न है.

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रिटर्न

लिक्विड फंड बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट या सेविंग अकाउंट में निवेश की तुलना में अधिक रिटर्न देने की क्षमता के कारण रिटेल निवेशकों के बीच लोकप्रिय हैं. वहीं, इनकी अधिक लिक्विडिट उन्हें सेविंग अकाउंट का बेहतर विकल्प बनाती है. पिछले कुछ साल का औसत रिटर्न देखें तो लिक्विड फंड ने 7 फीसदी के आस पास रिटर्न दिया है, जो कि सेविंग क्या डेट फंड्स रिस्क फ्री होते हैं? अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज 4 फीसदी और एफडी पर मिलने वाले ब्याज 6 से 6.5 फीसदी से अधिक है.

लिक्विड फंडों के लाभ

लिक्विड फंडों की मेच्योरिटी 91 दिनों की होती है.
निवेशकों को इनमें बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट के जैसा ब्याज मिलता है.
इन स्कीम में निवेश के अगले दिन पैसा निकाला जा सकता है, यानी यह सेविंग्स अकाउंट की तरह भी काम करता है.
इनमें लिक्विडिटी की समस्या नहीं है.
लिक्विड फंड सेफ माने जाते हैं क्योंकि ये शॉर्ट टर्म के लिए बॉन्डों में निवेश करते हैं.
लिक्विड फंडों पर ब्‍याज दर के उतार-चढ़ाव का जोखिम सबसे कम होता है, क्‍योंकि प्राथमिक रूप से ये अल्‍पावधि की मेच्‍योरिटी वाले फिक्‍स्‍ड इनकम सिक्‍युरिटीज में निवेश करते हैं.

कैसे लगता है टैक्स?

एक प्रकार का डेट फंड होने की वजह से, लिक्विड फंड पर कैपिटल गेन के अनुसार टैक्स लगता है. टैक्स की दर होल्डिंग अवधि पर निर्भर करती है, यानी वह अवधि जिसके लिए निवेशक ने अपने पैसे को फंड में निवेश किया है.

अगर आप 3 साल के निवेश से पहले राशि निकाल लेते हैं, तो निवेशक पर आयकर स्लैब के अनुसार शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स लगेगा. उदाहरण के लिए, अगर कोई निवेशक इससे 30,000 रुपये प्राप्त करता है, तो लिक्विड फंड में निवेश के माध्यम से 30,000 रुपये निवेशक के आयकर स्लैब में जोड़ दिए जाते हैं. उसी के अनुसार टैक्स लगाया जाता है. अगर कोई निवेशक 3 साल के कैपिटल गेन समेत निवेश वापस लेता है, तो इंडेक्सेशन के लाभ के साथ 20 फीसदी का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगाया जाता है.

निवेश के रिस्क

लिक्विड फंड के मामले में रिस्क फैक्टर कम है. ऐसा इसलिए है क्योंकि ये जिन सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं, उनकी मेच्योरिटी बहुत कम होती है. इन फंड में स्थिर रिटर्न मिलता है, जबकि अन्य डेट फंड में ब्याज दर आउटलुक के हिसाब से उतार चढ़ाव रहता है. हालांकि उेसा नहीं है कि ये पूरी तरह से रिस्क फ्री हैं. अंतिम पेमेंट पर डिफाल्ट रूप से डेट सिक्योरिटी जारी करने की संभावना हमेशा बनी रहती है.

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