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एक दलाल चुनना

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विद्वान मजिस्ट्रेट ने, अन्य बातों के साथ, परिव‌िक्षा अधिकारी से इतिहास, चरित्र, और पीड़ित (ए), (बी), और (सी) के रिश्तेदारों की उपयुक्तता के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। पीड़ित (ए), (बी), और (सी) को नवजीवन महिला वस्‍तिगृह, देवनार, मुंबई को मध्यवर्ती हिरासत के लिए दिया गया थी। मजिस्ट्रेट ने यह भी सोचा कि एनजीओ, जस्टिस एंड केयर को “नवजीवन महिला वस्‍तिगृह” में रहने के दौरान पीड़ितों (ए), (बी), और (सी) को प्राथमिक शिक्षा देने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए।

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रेसलर कविता देवी (दलाल) का जीवन परिचय

कविता देवी एक पहली भारतीय पेशेवर बेहद मजबूत महिला पहलवान है जो इस खेल की बुनयादी समझ रखती है, साथ ही जीतने का जूनून भी रखती है. कविता को यंग क्लासिक में प्रतिस्पर्धा करने के लिए चुना गया है, जोकि पहली बार एक भारतीय महिला के लिए एक एतिहासिक डब्ल्यूडब्ल्यूई टूर्नामेंट साबित हो सकता है.

Table of Contents

कविता देवी का परिचय एवं व्यक्तिगत जानकारी (Kavita Devi Profile and Personal Details)

वास्तविक नाम कविता देवी दलाल
उपनाम हार्ड केडी
जन्म सन 1983 में
भाई का नाम संदीप दलाल
पति का नाम गौरव तोमर (वॉलीबॉल खिलाड़ी)
व्यवसाय रेसलर
वजन 63 किलोग्राम
नागरिकता भारतीय
धर्म हिन्दू
वैवाहिक स्थिति विवाहित
बालों का रंग काला
आँखों का रंग गहरा भूरा
राशि वृश्चिक
ऊँचाई 5 फीट 9 इंच
शारीरिक बनावट सीना- 35 इंच, कमर- 30 इंच, हिप्स- 34 इंच
पसंदीदा भोजन दुग्ध उत्पाद

कविता देवी का शुरूआती जीवन (Kavita Devi Early Life)

कविता देवी जिनका वास्तविक नाम कविता दलाल है उनका जन्म हरियाणा के एक छोटे से जिले जिंद के एक गांव जिसका नाम मालवी (जुलाना) है में हुआ था. 2011 की भारतीय जनगणना के मुताबिक इस गांव की जनसंख्या 6000 से भी कम थी, इस गांव में महिला एथलीटों के प्रतिभा को उभारने के लिए कोई सुविधा नहीं है. हरियाणा भारत का दूसरा सबसे ख़राब राज्य है जहां कन्या भ्रूण हत्या का अपराध एक प्रमुख मुद्दा है. जिस तरह से उन्होंने कामयाबी हासिल की है वह सभी के लिए प्रेरणादायक है.

कविता के पिता एक पूर्व पुलिस अधिकारी थे. कविता के अनुसार उनके बड़े भाई संदीप दलाल ने ही उन्हें उच्च शिक्षा लेने और भारत्तोलन के लिए प्रोत्साहित किया है. जिस वजह से आज वे कामयाब हुई है वे इस कार्य के लिए अपने भाई को श्रेय देती है. कविता के पति गौरव तोमर वॉलीबॉल खिलाड़ी है साथ ही वे सशस्त्र सेना बल में भी काम करते है. उन्होंने 2009 में शादी की था. अपनी पत्नी को समर्थन प्रदान करने के लिए उन्होंने अपने खेल करियर को छोड़ दिया. गौरव उत्तर प्रदेश के बागपत से है. इस दम्पत्ति को अभिजीत नाम का एक 5 वर्षीय बेटा भी है, जो कि 2012 में पैदा हुआ था. कविता ने एक इंटरव्यू में कहा था, कि उन्होंने काफ़ी संघर्ष करने के बाद अपने परिवार के समर्थन की बदौलत ही कामयाबी हासिल की है.

कविता देवी की शिक्षा (Kavita Devi Education)

कविता गांव में ही पली बड़ी है और जुलाना के गर्ल्स सीनियर सेकेंड्री स्कूल से अपनी पढाई पूरी की है. उन्होंने ला मार्टिनियर लखनऊ नामक विश्वविद्यालय से 2004 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की.

कविता वेटलिफ्टिंग, विशु और मिश्रित मार्शल आर्ट में राष्ट्रीय स्तर की चैम्पियन रही है. लेकिन उनका आकर्षण हमेशा वेटलिफ्टिंग की तरफ ही रहा है. कविता 20 वर्ष की उम्र में एक दलाल चुनना ही अपने भाई की सलाह पर गृह नगर में स्थित एक भारत्तोलन अकादमी में भारत्तोलन का प्रशिक्षण लेने के लिए शामिल हो गयी थी. उसके बाद हरियाणा के फरीदाबाद में 2002 में उन्होंने प्रशिक्षण लिया. 2007 में वे कई बार राष्ट्रीय वरिष्ठ भारत्तोलन चैम्पियन रही. उन्होंने खेल कोटा के तहत 2008 में सशस्त्र सीमा बल में कांस्टेबल के पद को प्राप्त किया था. दलाल को पदोन्नति के एक दलाल चुनना लिए आश्वासन मिला था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे बढ़ावा नहीं दिया. कविता ने एसएसबी में उप निरीक्षक के पद के लिए 2010 के भारत्तोलन में भाग न लेने का फैसला किया था, क्योकि उन्हें सरकार द्वारा कई टूर्नामेंटों में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति नहीं दी गयी थी यहाँ तक कि रूस में एक अन्तर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भी शामिल नहीं होने दिया गया था.

वरुण धवन और नताशा दलाल की रॉयल वेडिंग के लिए चुना अलीबाग का ये लग्जरी मेंशन, विराट कोहली-अनुष्का शर्मा के वेडिंग प्लानर को सौंपी एक दलाल चुनना शादी की जिम्मेदारी

वरुण धवन और नताशा दलाल 24 जनवरी को शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं । दोनों की शादी मुंबई से सटे अलीबाग में एक निजी समारोह के बीच संपन्न होगी । कोरोना महामारी के चलते उनकी शादी में सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है । वरुण धवन और नताशा की शादी के फ़ंक्शन 22 जनवरी से शुरू हो जाएंगे और ये 5 दिनों तक चलेंगे । शादी का आखिरी फ़ंक्शन मुंबई में आयोजित होने वाला वेडिंग रिसेप्शन होगा । इस शादी में परिवार सहित महज 40 से 50 लोग ही शामिल होंगे । माना जा रहा है कि यह 5 दिनों की “क्लोज्ड डोर वेडिंग” होगी ।

वरुण धवन और नताशा दलाल की रॉयल वेडिंग के लिए चुना अलीबाग का ये लग्जरी मेंशन, विराट कोहली-अनुष्का शर्मा के वेडिंग प्लानर को सौंपी शादी की जिम्मेदारी

वरुण धवन और नताशा दलाल 24 जनवरी को लेंगे सात फ़ेरे

खबरों की मानें तो अलीबाग के जिस लग्जरी रिसॉर्ट में वरुण और नताशा की शादी होने वाली है उसका नाम द मेंशन हाउस है इसमें 25 रूम है । शादी समारोह आलिशान तरीके से किया जाएगा । दिलचस्प बात ये है कि विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के वेडिंग प्लानर ही वरुण धवण के वेडिंग को प्लान करने वाले हैं । 24 जनवरी को वरुण और नताशा की सनसेट वेडिंग होगी ।

5 दिनों तक चलने वाले इस शादी के पहले फ़ंक्शन की शुरूआत संगीत सेरेमनी से होगी । माना जा रहा है कि ये वरुण और नताशा का की शादी का ये संगीत कार्यक्रम एकदम बॉलीवुड स्टाइल में होगा जिसमें कई बॉलीवुड सेलिब्रिटिज परफ़ोर्म करेंगे । संगीत में शामिल होने वाले बॉलीवुड सेलिब्रिटिज हैं- अर्जुन कपूर, सारा अली खान, मलाइका अरोरा, शशांक खेतान, जाह्नवी कपूर, ख़ुशी कपूर, जैकी भगनानी, मनीष मल्होत्रा, करण जौहर, नीतू कपूर, अनिल कपूर, रिया कपूर, हर्ष वर्धन कपूर, और कियारा आडवाणी इत्यादि ।

इंटरनेट व्यापार

Internet Trading

इंटरनेट ट्रेडिंग इंटरनेट के जरिए विदेशी मुद्रा, स्टॉक और कमोडिटी बाजारों और इलेक्ट्रॉनिक मार्केटप्लेस पर ट्रेडिंग के पहुंचने का एक तरीका है, जो व्यापारियों को स्वतंत्र रूप से रीयल टाइम ट्रांजेक्शन करने का मौका देता है ।

इंटरनेट की सूरत से पहले निवेशकों व व्यापारियों को सूचना मिल रही थी और फोन द्वारा दलालों को आदेश दे रहे थे, जिससे कारोबार की प्रक्रिया धीमी पड़ रही थी । प्रौद्योगिकियों के विकास के साथ और इंटरनेट की उपस्थिति के साथ, स्टॉक एक्सचेंज पर व्यापार आसान और अधिक सुलभ हो गया ।

नब्बे के दशक के मध्य में विदेशी मुद्रा बाजार के कई डीलरों और दलालों ने अपना विकास करना शुरू कर दिया व्यापारिक प्लेटफार्मों , जो सरल बनाने के लिए और से आदेश प्राप्त करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए चाहिए थे व्यापारियों. शुरू में, ट्रेडों बंद ऑनलाइन ब्रोकरेज नेटवर्क है, जो प्रबंधन डेटाबेस एक दलाल चुनना और ऑनलाइन उद्धरण के साथ ग्राहकों को प्रदान के माध्यम से बाहर किया गया । समय की उस अवधि के दौरान बाजार में वर्चस्व ' ग्राहकों के अनुरोधों, जो एक कंप्यूटर के माध्यम से भेजा गया था की सरल निष्पादन की योजना थी, तो दलाल उंहें संसाधित और एक निष्पादन के लिए प्रेषित । सेवाओं के इन प्रकार के शेयर बाजार के पेशेवर प्रतिभागियों के लिए मुख्य रूप से दिलचस्प थे, लेकिन, 2000 के दशक की शुरुआत में, वहां कई निपटने कंपनियों के क्षेत्र में अपनी सेवाओं की पेशकश दिखाई ऑनलाइन ट्रेडिंग व्यापारियों की व्यापक जनता के लिए ऑनलाइन ट्रेडिंग । ऑनलाइन ट्रेडिंग की उपलब्धता ने गैर-पेशेवर निवेशकों को आकर्षित किया, जो वित्तीय साधनों के उपयोग के संबंध में अतिरिक्त सेवाओं की भी जरूरत थी । आज, दलाल विश्लेषणात्मक जानकारी और विश्लेषण के उपकरणों के लिए एक पहुंच के साथ एक ग्राहक प्रदान करता है, यह प्राप्त करता है और अनुरोधों को कार्यांवित और आवश्यकता के मामले में ग्राहक के साथ फोन या इंटरनेट द्वारा परामर्श ।

ऑनलाइन ट्रेडिंग क्या है?

आजकल लगभग सभी दलाल (डेमो खाते खोलने के अवसर के साथ) आरामदायक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के साथ व्यापारियों को उपलब्ध कराने के लिए इंटरनेट का उपयोग करते हैं, विश्लेषणात्मक समर्थन और यंत्र तकनीकी विश्लेषण । इंटरनेट का उपयोग करते हुए, एक व्यापारी आसानी से लेनदेन करने के लिए सभी आवश्यक जानकारी कभी भी और दुनिया के किसी भी हिस्से से प्राप्त कर सकते हैं । मोबाइल डिवाइसेज के लिए ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की शक्ल के साथ, स्मार्टफोन की उपलब्धता और सेल्यूलर नेटवर्क के कनेक्शन के लिए किसी भी जगह से ट्रेडिंग के लिए काफी कुछ किया गया है, जहां मोबाइल कनेक्शन उपलब्ध होगा ।

औपचारिक रूप से ब्रोकरेज कंपनियां विभिन्न वित्तीय साधनों का एक्सेस प्रदान करती हैं, लेकिन उनकी सेवाएं बिल्कुल नहीं के बराबर हैं । वहां एक दलाल को चुनने के लिए कई मानदंड हैं: सुविधा और ट्रेडों के लिए उपयोग की गति, जमा की ंयूनतम राशि, प्रसार, नियम और एक खाते से वापसी की लागत, की पेशकश की उपकरणों, लाभ उठाने, आदि के सेट

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न्यायालय ने कहा कि उक्त अधिनियम [इम्मोरल ट्रैफिक (प्र‌िवेंशन) एक्ट, 1956] मजिस्ट्रेट को, कानूनी की उचित प्र‌क्रिया का पालन करने के बाद इस प्रभाव में किसी अंतिम आदेश के ब‌िना, पीड़ितों को 3 सप्ताह से अधिक की अवधि के ‌लिए अभिरक्षा में रखने का अधिकार नहीं देता है। न्यायालय ने तब कहा कि अधिनियम की धारा 17 (4) में प्रावधान है कि जांच पूरी होने के बाद, यदि मजिस्ट्रेट संतुष्ट है, तो वह उप-धारा (5) के प्रावधानों के अधीन एक आदेश दे सकता है कि पीड़ितों को ऐसी अवधि के लिए एक संरक्षात्मक आवास में हिरासत में लिया जाए, वह एक वर्ष से कम नहीं ‌हो और तीन वर्ष से अधिक नहीं हो, जैसा कि आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है, जिसके लिए मजिस्ट्रेट लिखित कारण देगा।

यह नोट करना उचित है कि न्यायालय ने देखा कि अधिनियम की धारा 17 (4) के प्रावधान उपधारा (5) के प्रावधान के अधीन हैं, जो प्रदान करता है कि जांच कम से कम 5 व्यक्तियों के पैनल द्वारा आयोजित की जाएगी, जिन्हें उक्त उपधारा (5) के अनुरूप नियुक्त किया जाए। इस मामले में कानून के तहत तय की गई कोई जांच नहीं की गई।

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न्यायालय ने कहा कि रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं है कि याचिकाकर्ता वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से किसी व्यक्ति को ललचा रही थीं और न ही यह दिखाने के लिए कोई सामग्री थी कि वे वेश्यालय चला रही थीं। इसके अलावा, कोर्ट ने कहा, “ऐसा लगता है कि विद्वान मजिस्ट्रेट को आदेश को पारित करते हुए इस तथ्य के प्रभाव में आ गए कि याचिकाकर्ता एक विशेष जाति की हैं।

न्यायालय ने यह भी कहा कि पीड़ितों को उनकी इच्छा के विपरीत अनावश्यक हिरासत में नहीं रखा जा एक दलाल चुनना सकता है और उन्हें सुधारात्मक संस्थान में रहने के लिए कहा जाना चाहिए। रिकॉर्ड पर कोई सामग्री नहीं है जो यह बताती है कि पीड़ित किसी भी विकलांगता या किसी भी बीमारी से पीड़ित हैं ताकि उचित प्रतिबंध लगाए जा सके। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट किया गया कि पुलिस का यह मामला भी नहीं था कि पीड़ितों को मुक्त करने से समाज को कुछ खतरा होगा।

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कोर्ट ने कहा, “लगभग एक वर्ष से पीड़ितों को उनकी इच्छा के खिलाफ सुधारात्मक गृह में हिरासत में रखा गया है और इसलिए, यहां बताए गए कारणों के लिए, उन्हें रिहा करने की आवश्यकता है।” उल्लेखनीय है कि कि एक वेश्यालय के मालिक द्वारा दायर एक अग्रिम जमानत को खारिज करते हुए, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा था कि वाणिज्यिक यौनकर्म की लिए शोष‌ित यौनकर्मी पीड़ित हैं और उन्हें इम्मोरल ट्रैफिक(प्र‌िवेंशन) एक्ट के तहत गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए, जब तक रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से यह पता नहीं चलता कि वे अपराध में सह-साजिशकर्ता के रूप में शामिल थीं।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 सितंबर) को केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि वे महामारी के कारण संकट से जूझ रहे यौनकर्मियों को भोजन और वित्तीय सहायता प्रदान करें। जस्टिस एल नागेश्वर राव और हेमंत गुप्ता की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया कि वे पहचान के प्रमाण पर जोर दिए बिना राशन, मौद्रिक सहायता के साथ-साथ मास्क, साबुन और सैनिटाइजर के रूप में उन्हें राहत प्रदान करने पर तत्काल विचार करें।

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न्यूज़लॉन्ड्री हिन्दी के साप्ताहिक संपादकीय, चुनिंदा बेहतरीन रिपोर्ट्स, टिप्पणियां और मीडिया की स्वस्थ आलोचनाएं.

अपने किसी पुराने आलेख में मैंने भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव के एक लेख का किसी और संदर्भ में ज़िक्र किया था. सुब्बाराव के लेख में प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान यहूदियों पर हुए नाज़ी अत्याचारों को लेकर 1982 में बनी एक बहुचर्चित फ़िल्म ‘Sophie’s Choice ’ का उल्लेख था. फ़िल्म में पोलैंड की एक यहूदी मां के हृदय में मातृत्व को लेकर चलने वाले इस द्वंद्व का वर्णन है कि वह अपने दो बच्चों में से किसे तो तुरंत मौत के ‘गैस चेम्बर‘ में भेजने की अनुमति दे और किसे नाज़ियों के ‘यातना शिविर’ (Labour camp) में ले जाए जाने की. सुब्बाराव ने फ़िल्म के कथानक का उल्लेख इस संदर्भ में किया था कि सरकार के सामने भी यहूदी मां की तरह ही संकट यह है कि वह उपलब्ध दो में से पहले किस विकल्प को चुने— लोगों की रोज़ी-रोटी बचाने का या उनकी ज़िंदगियां बचाने का. दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि सरकार एक भी विकल्प पर ईमानदारी नहीं बरत सकी.

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